आज फिर तुमसे मिलने को दिल चाहता है
निगाहों में खिलने को दिल चाहता है
गुस्ताखियाँ तो बहुत की थी मैंने
मनमानी करने को दिल चाहता है ||
मोहब्बत की कुछ ये कहानी अजब है
अदाओं में पायी नयी ज़िन्दगी है
इशारों-इशारों में बातें क्या कर दी
निगाहें मिलाने को दिल चाहता है ||
तसव्वुर है तेरा तेरी बात है यूँ
की भूला जहाँ मैं नहीं याद खुद को
तेरी बातों ने ऐसा जादो किया है
की फिर झिलमिलाने को दिल चाहता है ||
तनहाइयाँ थी बहुत ज़िन्दगी में
थे गम मुझपे भरी, ख़ुशी मुझसे रूठी
तेरी चाहतों का असर कुछ हुआ यूँ
की फिर मुश्कुराने को दिल चाहता है ||
aapki poems to padhne ko dil chahta hai :)
जवाब देंहटाएंgreat work sir :)
thank you dear....
जवाब देंहटाएंI hope ki main tumhari ummedon par khara utar saku....:)