वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं
बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥
कल तक जो दिखते ना थे अंदर से
वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ॥
काफ़ी शांत था, शोर बहुत कम था अंदर
ना जाने क्यों मुझे देख आज सारे चिल्ला रहे हैं ॥
मेरी बात को समझते नहीं हैं आखिर तक
जब रोऊँ तो सब गोद में खिला रहे हैं ॥
मज़ा आ रहा है इनकी टेढ़ी-मेढ़ी शक्लें देखकर
मुझे हँसाने के लिए ये जो बना रहे हैं ॥
सारे नाते-रिश्तेदार लगे हैं मेरी सेवा में
मेरा साथ पा कर सब क्यों इतना इतरा रहे है ॥
मैं चैन से सो सकूं खुश रहकर ' आखिर '
इस खातिर सब अपनी नींदें गवां रहे हैं ॥
॥ आखिर ॥
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