उनसे दूर दिल का हाल कैसा है?
मत पूछ हमसे ये जंजाल कैसा है?
हम जागते-सोते हैं बस तसव्वुर में उनके
ना जाने उनका हुस्न-ओ-जमाल कैसा है?
मेरे हर सवाल का जवाब हैं वो
पर मेरे हर जवाब पर सवाल कैसा है?
उनकी खुशी की खातिर लुट जाऊं मैं आगर
तो मेरे लुटने पर ये बवाल कैसा है?
उनकी ख्वाहिशें मेरी मंजिलें बन गयीं हैं
मेरी ख्वाहिशों का ये इकबाल कैसा है?
मेरे प्रेम की इक़्तिज़ा सिर्फ वो हैं 'आखिर'
मेरे दिल का उन पर इख्तियार ऐसा है!
||आखिर||
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