हम तेरी मोहब्बत में महसूस ये करते हैं
थे जिंदा अभी तक हम अब जिंदगी जीते हैं।।
ना जाने इन आँखों ने क्या जादू किया हम पर
हम भूल गए खुद को बस याद तू रहती है।।
हर रात तू आती है ख्वाबों में मेरे ऐसे
जैसे कोई शहज़ादी चंदा से उतरती है।।
ना जाने हुआ क्या है जब से हूँ मिला तुमसे
अब आप ही सर मेरा तेरे सजदे में झुकता है।।
तेरे प्यार ऐ साहिब ना जाने क्या जादू है
मेरी गज़लों में अब बरबस तेरा रूप झलकता है।।
जब से तुम्हें देखा है इन आँखों ने ऐ जानम
तब से इन आँखों को कोई और ना जचता है।।
ना जाने हुआ क्या है मेरी ख्वाहिशों को "आखिर"
तेरी ख्वाहिशों के आगे चुपचाप ये रहती हैं।।
।।आखिर।।
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