सोमवार, 9 नवंबर 2015

मनाना चाहता हूँ हर एक त्योहार मैं घर में
रहना चाहता हूँ हर खुशी में घर के आँगन में
मगर ना जाने कैसी जिंदगी ये हो गयी "आखिर"
कि घर से दूर हूँ मैं साथ ना परिवार मेरा है
मना मैं भी रहा हूँ आज का त्योहार सबके संग
मगर दिल कह रहा है आज ना त्योहार मेरा है।।

।।आखिर।।

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