हर शाम तन्हाई में किसी का इंतज़ार है
इन खुश्क से होटों पे न जाने कैसी प्यास है
चाहत यही के राज़ेबयाँ कर दूँ मैं दिल का
पर नज़रों को पढना भी प्यार है ||
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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