गुरुवार, 16 जुलाई 2015

प्यार बाकी है

निगाहें हैं मिली जबसे ये दिल बेकरार काफी है
मोहब्बत हो गयी इसको मगर इकरार बाकी है ॥

कभी आओ मिलो हमसे ख्वाबों के अलावा भी
कि दो अल्फाज़ो में इस प्यार का इज़हार बाकी है ॥

उन्ही आँखों को ढूंढें दिल हर एक पर्दानशीं में अब
कभी चिलमन तो बिखराओ अभी दीदार बाकी है ॥

मगर डरता हूँ तेरा चाँद सा चेहरा जो देखा तो
कहीं मैं ईद ना कर लूँ अभी रमज़ान बाकी है ॥

जब से साथ तू है इल्म न मुझको है मौसम की
शायद ढल गया है दिन, शायद रात बाकि है ॥

अभी तो आये हो और फिर अभी ये हिज्र की बातें
ज़रा कुछ देर तो ठहरो वस्ल की रात बाकी है ॥

जहाँ में है पता सबको ये मेरी राज़-ए-ख़ामोशी
फकत तू ही न समझे है तेरा कि प्यार बाकी है ॥

तेरे हुजरे में तेरा चाँद एक दिन आएगा "आखिर"
ज़रा तो सब्र कर अब भी उमर तमाम बाकी है ॥

||आखिर|| 

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